खैरागढ़ । गांव की किसान खबरें
ग्राम पंचायत बिडौरी के आश्रित ग्राम घुमर्रा में गोवंश की देखरेख को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी और ग्रामीणों के बयानों के अनुसार, यहां जाली से घेरकर लगभग 50 गायों को रखा गया था। आरोप है कि पर्याप्त चारा-पानी नहीं मिलने के कारण इनमें से करीब 15 गायों की मौत हो चुकी है। हालांकि, मृत गोवंश की वास्तविक संख्या और मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
ग्रामीण ने बताई गोवंश की स्थिति
ग्रामीण कलीराम बंजारे के अनुसार, घुमर्रा बस्ती में तार-जाली से घेरकर गोवंश को रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहले यहां लगभग 50 गायें थीं, लेकिन अब करीब 30 से 35 गायें ही बची हैं। उनका आरोप है कि गोवंश के लिए चारा-पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। एक गाय के गंभीर रूप से चोटील होने का बात भी सामने आई है, जिसकी देखभाल को लेकर बंजारे ने चिंता जताई है।
कलीराम बंजारे का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि गोवंश को वहां किसने रखा है और उनकी देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है। उनके अनुसार, इस संबंध में उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंची है या नहीं, इसकी भी उन्हें जानकारी नहीं है।
एक महीने से देखरेख कर रहीं महिलाएं
गोवंश रखने के स्थान के पास रहने वाली महिलाओं ने बताया कि उन्हें लगभग एक महीने से गायों को चारा-पानी देने और उनकी देखरेख करने के काम पर रखा गया है। उनका कहना है कि इससे पहले नियमित रूप से देखरेख करने वाला कोई नहीं था।
महिलाओं ने बारिश के दौरान कुछ गायों की मौत होने की बात भी कही। हालांकि, उनके बयानों के अनुसार मृत पशुओं की संख्या और मौत के कारणों का सत्यापन आवश्यक है।
सरपंच ने दी ₹15 हजार की जानकारी
ग्राम पंचायत बिडौरी के सरपंच आशीष ठाकुर ने बताया कि घुमर्रा में गोवंश रखा गया है। उनके अनुसार, पहले लगभग 50 गायें था और वर्तमान में करीब 30 गायें हैं। शेष गायों के संबंध में उन्होंने भी स्पष्ट जानकारी नहीं होने की बात कही।
सरपंच के मुताबिक, गांव में गोवंश की व्यवस्था के लिए एक समूह बनाया गया है। समूह के सदस्यों द्वारा राशि की मांग किए जाने पर ग्राम पंचायत के फंड से ₹15,000 दिए गए थे। सरपंच ने बताया कि यह राशि चारा-पानी और तार-जाली की व्यवस्था के लिए दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि गोवंश की देखरेख के लिए ₹3,000 में काम करने वाले व्यक्ति रखे गए हैं।
सरपंच के अनुसार, इस मामले में अब तक उच्च अधिकारियों को किसी प्रकार की शिकायत या सूचना नहीं दी गई है।
जांच और जवाबदेही की जरूरत
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले रखी गई गायों में से शेष पशु कहां गए और जिन गायों की मौत होने का दावा किया जा रहा है, उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? साथ ही, गोवंश के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया तथा चारा-पानी और घायल पशु के उपचार की समुचित व्यवस्था थी या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
यदि गोवंश की देखरेख में लापरवाही हुई है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। संबंधित पशुपालन विभाग और प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर गोवंश की वास्तविक संख्या, मृत पशुओं की स्थिति, उपलब्ध चारा-पानी और उपचार की व्यवस्था की जांच करनी चाहिए।
फिलहाल, गोवंश की मौतों की संख्या, मौत के कारणों और देखरेख की जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक जांच तथा संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।