अक्टूबर माह में किसानों को खेती-किसानी के जरूरी कार्य समय पर करने की सलाह
पामगढ़। अक्टूबर माह किसानों के लिए खरीफ फसलों की कटाई के साथ रबी फसलों की तैयारी का महत्वपूर्ण समय है। किसानों को खेत की तैयारी, रबी फसलों की समय पर बुवाई, सब्जियों की नर्सरी तैयार करने, फलोद्यान की देखभाल तथा धान एवं अन्य फसलों में कीट-रोगों की निगरानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसी उद्देश्य से संयुक्त जन जागरूकता अभियान द्वारा किसानों के हित में अक्टूबर माह के प्रमुख कृषि कार्यों की सलाह जारी की गई है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान समाज सेवक स्व. हिंच्छाराम खरे एवं स्व. गणेशराम खरे तथा महान देहदानी स्व. मनोज कुमार खरे की स्मृति में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे (सस्यविज्ञान) एवं प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी जितेंद्र कुमार खरे ने किसानों को अक्टूबर माह में किए जाने वाले प्रमुख कृषि कार्यों की जानकारी दी है।
सलाह के अनुसार रबी फसलों की तैयारी के लिए खाली खेतों में ट्रैक्टर चालित रोटावेटर अथवा कल्टीवेटर से उथली जुताई करने, फूलगोभी, पत्तागोभी एवं गांठगोभी की अगेती किस्मों की नर्सरी तैयार करने तथा टमाटर, बैंगन, मिर्च एवं शिमला मिर्च की खेती की तैयारी करने कहा गया है। बीजों का उपचार अनुशंसित विधि से करने की सलाह भी दी गई है।
फलोद्यान में वृक्षों के तनों पर बोर्डो पेस्ट लगाने, साफ-सफाई रखने तथा वृक्षों के चारों ओर थाला बनाकर निर्धारित मात्रा में खाद एवं उर्वरक देने की सलाह दी गई है। तैयार केले एवं पपीते के पौधों को मुख्य खेत में लगाने तथा शरद ऋतु के एकवर्षीय पौधों की रोपाई करने का भी सुझाव दिया गया है।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि पक चुकी धान की फसल की कटाई के बाद अनाज को 1 से 2 दिनों तक धूप में सुखाना चाहिए। देर से बोई गई धान की फसल की लगातार निगरानी तथा वर्षाकालीन मूंगफली की समय पर खुदाई करने की सलाह दी गई है। तिवड़ा की उन्नत प्रजातियों का उपयोग करने और चने की समय पर बुवाई कर उकठा रोग से बचाव के उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
धान में भूरा माहो एवं पेनिकल माइट जैसे कीटों की निगरानी करने तथा प्रकोप होने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही कीटनाशक एवं अन्य कृषि रसायनों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
पशुपालन के क्षेत्र में पशुबाड़ा, मुर्गीघर तथा तालाब-पोखरों के आसपास खरपतवारों की नियमित सफाई करने की सलाह दी गई है, ताकि मक्खी-मच्छरों का प्रकोप कम किया जा सके। किसानों से अपने मवेशियों को खुरहा-चपका बीमारी से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराने की अपील भी की गई है।
किसानों को कृषि संबंधी जानकारी के लिए ‘क्रॉप डॉक्टर’, ‘राइस आई.एफ.सी.’ एवं ‘हर्बकेल-हर्बिसाइड कैलकुलेटर’ जैसे कृषि उपयोगी एप की जानकारी लेने तथा अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि अक्टूबर माह में मौसम एवं फसल की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्य समय पर पूरा करें, जिससे उत्पादन एवं फसल की गुणवत्ता बेहतर हो सके।