पामगढ़। गांव की किसान खबरें
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में वर्षा और तेज हवाएं चलने की संभावना को देखते हुए किसानों के लिए कृषि मौसम आधारित सलाह जारी की गई है। संयुक्त जन जागरूकता अभियान के अंतर्गत वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे एवं प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी जितेंद्र कुमार खरे ने किसानों को फसलों की सुरक्षा, जल निकासी तथा पशुओं को सुरक्षित रखने के संबंध में आवश्यक सुझाव दिए हैं।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं महान समाजसेवी स्व. हिंच्छाराम खरे, स्व. गणेशराम खरे तथा महान देहदानी स्व. मनोज कुमार खरे की स्मृति में संचालित संयुक्त जन जागरूकता अभियान के तहत कृषक जनहित में यह निशुल्क कृषि मौसम आधारित सलाह जारी की गई है।
धान, दलहन और तिलहन की फसलों की सुरक्षा जरूरी
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि यदि धान, दलहन एवं तिलहन की खड़ी फसल पकने की अवस्था में है, तो मौसम की स्थिति को देखते हुए आगामी दो से चार दिनों तक कटाई का कार्य टालें। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि बारिश से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसके साथ ही खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करने की अपील की गई है।
किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने की सलाह भी दी गई है। फसलों में कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही अनुशंसित मात्रा में कीटनाशक अथवा कवकनाशक का उपयोग करें।
रबी फसलों की बुवाई मौसम देखकर करें
उतेरा फसल के रूप में तिवरा या अलसी की बुवाई करने वाले किसानों को फिलहाल कुछ दिनों तक बुवाई रोकने की सलाह दी गई है। वहीं, रबी मौसम में फसल लेने वाले किसान मौसम और खेतों की नमी की स्थिति अनुकूल होने पर नवंबर के प्रथम सप्ताह से बुवाई का कार्य शुरू कर सकते हैं।
फूलगोभी, ब्रोकली, चुकंदर, पछेती खीरा, करेला सहित अन्य सब्जियों की बुवाई भी स्थानीय मौसम एवं कृषि संबंधी अनुशंसाओं के अनुसार नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।
तेज हवाओं से फसलों और पौधों को बचाने के उपाय
चक्रवात के प्रभाव से वर्षा और तेज गति की हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए किसानों को लता वाली सब्जियों, जैसे करेला, लौकी एवं कद्दू वर्गीय फसलों को सहारा देने की व्यवस्था करने कहा गया है। केले के जिन पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस के सहारे से सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा बागवानी एवं सब्जी की फसलों को ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए उपलब्धता और आवश्यकता के अनुसार ओलावृष्टि रोधी जाली का उपयोग करने की अपील की गई है।
पशुओं की सुरक्षा और आकाशीय बिजली से बचाव पर जोर
आने वाले दिनों में बारिश की संभावना को देखते हुए पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। आकाशीय बिजली गिरने की आशंका के दौरान पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचने तथा सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई है।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से बिजली गिरने की पूर्व चेतावनी प्राप्त करने के लिए मोबाइल में दामिनी ऐप इंस्टॉल करने का सुझाव दिया है। इससे उपलब्ध पूर्व चेतावनी के आधार पर आवश्यक सावधानियां बरतने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऐप की चेतावनी पर ही निर्भर न रहें और मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का भी पालन करें।
कृषि उपयोगी मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की अपील
किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने के लिए क्रॉप डॉक्टर, राइस आईएफसी तथा हर्बिसाइड कैलकुलेटर जैसे कृषि उपयोगी मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी गई है। इन ऐप के माध्यम से फसलों की समस्याओं, रोग प्रबंधन एवं खरपतवार नियंत्रण से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है।
कृषक जनहित में जारी की गई सलाह
यह कृषि मौसम आधारित सलाह संयुक्त जन जागरूकता अभियान, पामगढ़ के माध्यम से किसानों के हित में निशुल्क जारी की गई है। अभियान से जुड़े वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर खरे, धर्मेन्द्र कुमार खरे, जितेंद्र कुमार खरे एवं वरिष्ठ समाजसेविका सुमन खरे ने किसानों से मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान देने तथा फसलों एवं पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।
प्रमुख मार्गदर्शक: डॉ. चंद्रशेखर खरे, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं प्रक्षेत्र प्रबंधक, कृषि विज्ञान केंद्र, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर।
अभियान: संयुक्त जन जागरूकता अभियान, पामगढ़।
संपर्क: 8770414150, 6264388869
संदेश: कृषक जनहित, समाजहित में प्रचारित एवं प्रसारित।