पालक चौपाल के मार्गदर्शन, पोषण और सतत देखभाल से बदली सेहत

Hemkumar Banjare
By -

 

राजनांदगांव

 जिला प्रशासन द्वारा संचालित पोट्ठ लईका पहल गंभीर कुपोषित बच्चों को सुपोषण की श्रेणी में लाने की दिशा में प्रभावी रूप से कार्य कर रही है। इस अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्रत्येक गुरूवार को आयोजित होने वाली पालक चौपाल के माध्यम से माताओं को बच्चों के पोषण, देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है। अंजोरा सेक्टर के आंगनबाड़ी केन्द्र कोपेडीह क्रमांक 1 में दर्ज श्रीमती ज्योति साहू का प्रसव स्वास्थ्य केन्द्र में सामान्य रूप से हुआ। जन्म के समय उनकी बच्ची का वजन मात्र 1.950 किलोग्राम तथा लंबाई 46 सेमी था, जो अति गंभीर कुपोषण की स्थिति को दर्शाता था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती हेमिन साहू ने तत्परता दिखाते हुए कंगारू मदर केयर, नियमित स्तनपान, स्वच्छ एवं गर्म वातावरण में देखभाल तथा सीमित संपर्क जैसे आवश्यक उपायों की जानकारी दी। साथ ही माता को पौष्टिक आहार लेने के लिए प्रेरित किया गया। पालक चौपाल के माध्यम से प्राप्त सलाह को परिवार ने गंभीरता से अपनाया तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा नियमित गृह भेंट कर सतत निगरानी भी सुनिश्चित की गई।  इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम शीघ्र ही दिखाई देने लगा।


श्रीमती ज्योति साहू ने बताया कि उन्होंने बच्ची को कंगारू मदर केयर 7 से 8 घंटे प्रतिदिन रखा और नियमित स्तनपान कराने से तीसरे दिन ही बच्ची का वजन बढ़कर 2 किलोग्राम हो गया। पांचवें दिन यह 2.160 किलोग्राम और सातवें दिन 2.290 किलोग्राम पहुंच गया। 14 दिनों में बच्ची का वजन 2.500 किलोग्राम हो गया। जनवरी 2026 में मात्र एक माह के भीतर बच्ची का वजन 3.130 किलोग्राम हो गया और वह मध्यम श्रेणी में आ गई। निरंतर देखभाल और पोषण के परिणामस्वरूप फरवरी 2026 के अंत तक बच्ची का वजन 4.700 किलोग्राम एवं लंबाई 54 सेमी हो गई। मार्च 2026 में बच्ची परिधी का वजन 5.010 किलोग्राम और लंबाई 58 सेमी दर्ज की गई। पोट्ठ लईका पहल के तहत पालक चौपाल से सही मार्गदर्शन, सलाह एवं समय पर देखभाल बच्ची परिधी साहू पूरी तरह से स्वस्थ एवं सामान्य श्रेणी में आ चुकी है।

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