गेहूं फसल में कीट एवं खरपतवार से बचाव के लिए किसानों को दी गई कृषि विभाग द्वारा समसामयिक सलाह

Hemkumar Banjare
By -
राजनांदगांव । गांव की किसान खबरें 
 जिले के अधिकांश गांव में गेहूं की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में गेहूं की बुवाई अभी भी जारी है। इस बीच कई जगहों पर गेहूं की फसल में कीट, रोग एवं खरपतवार की समस्या सामने आ रही है। जिससे किसानों की मेहनत और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि विभाग द्वारा किसानो को गेहूं फसल को किट व्यधियों से बचाने के संबंध में समसामयिक सलाह जारी किया गया है। देरी से बोई गई फसलों में दीमक अधिक सक्रिय होती है। यह फसल को नुकसान पहुंचाकर उत्पादन घटा सकती है। गेहूं की फसल में कीटों से बचाव के लिए बीज उपचार अत्यंत प्रभावी उपाय है। इसके लिए बीज को क्लोरोपाइरीफॉस 0.9 ग्राम प्रतिकिलो बीज, थायोमेथोक्साम 70 डब्ल्यूएस ग्राम प्रतिकिलो बीज या फिप्रोनिल (रीजेंट 5 एफएस) 0.3 ग्राम प्रतिकिलो बीज से उपचारित किया जा सकता है। बीज उपचार से दीमक एवं अन्य कीटों का प्रभाव कम होता है और फसल की अच्छी वृद्धि सुनिश्चित होती है। समय पर बोई गई फसली में दीमक का आक्रमण दिखे तो सिंचाई करना फायदेमंद है। गुलाबी तना छेदक कीट कम जुताई वाले खेतों में अधिक पाया जाता है। कीट दिखाई देते ही किनालफॉस (ईकालक्स) 800 मिली प्रति एकड़ का पत्तियों पर छिड़काव करें। खेतों में संकरी पत्ती वाले खरपतवार पाए जाने पर इसके नियंत्रण के लिए क्लोडिनाफॉप 15 डब्ल्यूपी 160 ग्राम प्रति एकड़ या पिनोक्साईन 5 इसी 400 मिली प्रति एकड़ में छिड़काव करें। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नियंत्रण के लिए 2, 4-डी ई 500 मिली प्रति एकड़ या मेटसल्फ्युरॉन 20 डब्ल्यूपी 8 ग्राम प्रति एकड़ संकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार पर छिड़काव करें। सिंचाई भी नुकसान कम करने में मदद करती है। सलकोसत्ययूरॉन 75 डब्ल्यू जी 13.5 ग्राम प्रति एकड़ या सल्फोसल्पयूरॉन मेटसल्फ्युरॉन बीओ डब्ल्यू जी 16 ग्राम प्रति एकड़ का मिश्रण पहली सिंचाई से पहले या 10-15 दिन बाद छिड़काव करें। वैकल्पिक रूप में मेसोसल्फ्यूरॉन आयीडोसल्फ्युरॉन 3.6 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी 160 ग्राम एकड़ में छिड़कावर कर सकते है। अगेती बुवाई वाले उच्च उपज वाले गेहूं क्लोरमेक्काट क्लोराइड 50 प्रतिशत फसल में शुरूआती पीलेपन को कभी-कभी रतुआ समझ लिया जाता है। पहला छिड़काव प्रथम नोड अवस्था (50-55 डीएएस) पर 160 लीटर प्रति एकड़ पानी में करें। फैलेरिस माइनर (कनकी, गुल्ली डंडा) बुवाई के 0-3 दिन बाद पाइरेट्स सल्फोन 85 डब्ल्यू जी 60 ग्राम प्रति एकड़ अकेले या पेडिमेथालिन 30 ईसी 2 लीटर प्रति एकड़ छिड़काव करें। वैकल्पिक मिश्रण के रूप में एक्लीनिफेन 450 + डाइपलुफेनिकन 75 + पाइरीक्सासल्फीन 50-800 मिली प्रति एकड़, पहली सिंचाई के 10-15 दिन बाद क्लोडिनाफॉप + मेट्रिब्यूजिन 12+42 प्रतिशत डब्ल्यूपी 200 ग्राम प्रति एकड़ छिड़काव करें।

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