पटेवा में कबीर प्राकट्योत्सव झांकी का हुआ मंचन

Hemkumar Banjare

राजनांदगांव। गांव की किसान खबरें 
पटेवा - राजनांदगांव जिला अंतिम छोर स्थित ग्राम पटेवा में त्रिदिवसीय कबीर सत्संग कार्यक्रम के द्वितीय दिवस की रात्रिकालीन बेला में कबीर प्राकट्य उत्सव समिति रामनगर भिलाई कलाकारों द्वारा श्री सदगुरू कबीर साहब की पूजा-अर्चना व‌ वंदन स्तुति का  मनमोहक झांकियां प्रस्तुत किया गया।श्री सदगुरू कबीर साहब को गगन मंडल से उतरते नूर का गोला रूप में  दिग्दर्शन कराते हुए लहरतारा के कमल पुष्प पर 
एक अद्भुत बालक के रुप में प्राकट्य होने का बहुत ही मनमोहक झांकियां प्रस्तुत की गई। इस प्रस्तुति के संचालक भागवत साहू,संचालन राधूदास साहू, हारमोनियम ईश्वर साहू ,बेन्जो बलराम निषाद,ढ़ोलक संतराम मंडावी ,नीरू -अनुप साहू,अष्टानंद गुलाल साहू सहयोगी भुखन साहू,मंजीरा गजानंद विश्वकर्मा, श्री मति नंदनी साहू, रूखमणी साहू,अनिता साहू,पुष्पा साहू, कविता साहू,कामेश साहू इन कलाकारों ने ग्राम पटेवा की सत्संग पण्ड़ाल में चार चांद लगा दिए। प्रस्तुतकर्ता कलाकारों ने श्री सद्गुरु कबीर साहब के प्राकट्य को नूर का अद्भुत गोला निर्गुण निराकार ब्रह्म को गगन मंडल से उतरते हुए दिखाया, साथ ही लहरतारा तालाब में एक अद्भुत बालक के रुप प्राकट्य होते हुए प्रस्तुति दी गई। सन्त श्वपच सुदर्शन के माता लक्ष्मी व पिता नरहर था । भक्त श्वपच सुदर्शन अपने जीवन अवधि पूर्ण करने के बाद सत्यलोकवासी‌ गया । उनके माता-पिता जन्म मरण के चक्कर में पड़ कर मुक्त नहीं सका। भक्त श्वपच सुदर्शन के अनुनय विनय पर सदगुरू कबीर साहब मनुष्य योनि में जन्म  दिया इस प्रकार  दुसरे जन्म में उनके माता-पिता को मुक्त कराने कुलपति और महेश्वरी के रूप जन्म लिया, तीसरे जन्म में चंदन एवं उदा के रूप जन्म लिया जो अंतिम जन्म में नीरू और नीमा दम्पति के रूप जन्म लिया,जिनका बाल्य काल शादी हुआ रहता है ।माता-पिता के कहने पर गवन कराने नीरू ससुराल जाते है। ससुराल से नीमा को लेकर आते हैं तो रास्ते में अचानक नीमा चक्कर आने लगती है और वे गिर जाती तभी नीरू की नजर लहरतारा तालाब पर पड़ती है नीमा को उस लहरतारा तालाब जाने को कहती है , नीमा तालाब पहुंच कर हाथ-पैर धोकर अंजली में पानी लेना चाहती है उसी समय एक अद्भुत बालक को कमल पुष्प देखकर भावुक हो जाती है लहरतारा तालाब से उठाकर ले आती है। नीरू नीमा आज की सामाजिक परिवेश गवन आई नई नवेली बहू के गोद बालक को देख कर अपराध ,गलत नजरिया का पटाक्षेप करते हुए। अद्भुत बालक का नामकरण अष्टानंद महराज द्वारा नामकरण का पंचांग लेकर नहीं बोल पाने नजारा के स्वंय अद्भुत बालक कबीर नाम उच्चारण करते हुए अष्टानंद महराज को विस्मृत कर दी । इस प्रस्तुति को कबीर सत्संग समिति पटेवा व समस्त ग्रामवासियों व दर्शकदिर्घा पर उपस्थित लोगों ने तहे दिल से प्रसंशा की।